miércoles, 1 de enero de 2014

विधानसभा में 'AAP की टोपी' पर बीजेपी ने उठाए सवाल

 मेरे ख्याल में अगर बी जे पी को 2014 चुनाव में विजय हासिल करनी है तो उसे फूहड़पन और हल्कापन छोड़ना पड़ेगा. 

चुनाव जीतने के लिये बी जे पी के पास एक ही रास्ता है के वो साबित करे के वो भी केजरीवाल जितनी या उससे ज़्यादा ईमानदार है. 

जनता भ्रष्टाचार मुक्त संस्थाएं चाहती है, विकास की बात बाद में. 

अगर बी जे पी ने समय की मांग नहीं पहचानी तो केजरीवाल जी को प्राइम मिनिस्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता. 

अगर कॉंग्रेस "आप" को डेल्ही विधान सभा में सपोर्ट जारी रखती है तो बी जे पी जीत कर भी हारी हुई मानी जायेगी. 

कॉंग्रेस को रिकवर करने के लिये पांच साल मिल जायेंगे और बी जे पी का सपना, सपना ही रह जायेगा.

जब कोई और विषय नहीं मिला तो छोटी छोटी गलतिओं को ही बड़ा कर के दिखाओ. कहते हैं "कूएँ में गिरि इंट सूखी बाहर नहीं निकलती, थाने में पहुँचा आदमी बिना मार खाये नहर नहीं आता." अब कुछ ऐसा, "संसद में सौगंध उठाने वाला मंत्री आलोचना से बच नहीं सकता". वजह जो भी हो, केजरीवाल जी को ऐसी गलतियाँ दोहरानी नहीं चाहियें.

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