miércoles, 1 de enero de 2014

सरकारी अस्पताल की हालत देख aap ke मंत्री भड़के

भड़केंगे नहीं तो कोई इन्हें गंभीरता से नहीं लेगा. 

अनुशासन लाने के लिये दबके का होना अति आवश्यक है. 

 ट्रान्स्फर करने की ज़रूरत भी पड़ेगी. 

दवाइओं के स्टॉक भी चेक करने पडेंगे. 

वैसे तो चाहिये के जो दवाइयां सरकारी असप्तालों में सप्लाइ होती है, उन पर लिखा जाना चाहिये "ओन्ली फॉर गवर्नमेंट हॉस्पिटल", टके जब यह बेज़ार में बिकें तो लोगों को पता चल जाये के इनका भुगतान सरकार द्वारा किया जा चुका है. 

अनेकों मुल्कों में ऐसा ही होता है.

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