miércoles, 1 de enero de 2014

सरकारी अस्पताल की हालत देख aap ke मंत्री भड़के

भड़केंगे नहीं तो कोई इन्हें गंभीरता से नहीं लेगा. 

अनुशासन लाने के लिये दबके का होना अति आवश्यक है. 

 ट्रान्स्फर करने की ज़रूरत भी पड़ेगी. 

दवाइओं के स्टॉक भी चेक करने पडेंगे. 

वैसे तो चाहिये के जो दवाइयां सरकारी असप्तालों में सप्लाइ होती है, उन पर लिखा जाना चाहिये "ओन्ली फॉर गवर्नमेंट हॉस्पिटल", टके जब यह बेज़ार में बिकें तो लोगों को पता चल जाये के इनका भुगतान सरकार द्वारा किया जा चुका है. 

अनेकों मुल्कों में ऐसा ही होता है.

गधी का दूध बिक रहा 2000 रु प्रति लीटर

गधा कौम पिछले 5000 साल से इंसानों से दोस्ती निभा रहा है. पूरी दुनिया में 4 क्रोड गधे हैं. 

ईजिप्ट से शुरु हुये और सरदारों की भांती धीरे धीरे पूरी दुनिया में फैले. 

यह खच्चर के रूप में पहाड़ी इलाकों में भी बेहद कामयाब हैं. 

इनका खुद का भार 80 से 480 किलो तक और गरीब देशों में ज़िंदगी 15 साल तक और अमीर देशों में 50 साल तक है. 

इनकी हाइट 31 इंच से 63 इंच के बीच होती है. 

गर्भाशय समय 11 से 14 महीने. 

भारत में इसे मूरख समझते हैं जबके दुनिया के दूसरे हिस्सों में इसे बुद्धिमान, सतर्क, दोस्ताना, चंचल, और शीघ्र सीखने वाला जनवर माना जाता है.

गधों की 185 किस्में हैं. 

इटली और चीन में इसका मीट खाया जाता है और इसके दूध का सौंद्राय प्रसाधन वस्तुओं को बनाने के लिये प्रयोग होता है.

कुदरत की तरफ से इसे जमीन पर तगड़ी पकड का तोहफा मिला है. 

शाकाहारी होते हैं और ईसाई लोग इसे शान्ती का दूत मानते हैं. 

गधा ईजिप्ट के सूर्य देवता का प्रतीक है. हिन्दू देवी कालरात्रि का वाहन गधा है. 

पंचतंत्र में इसकी कहानियाँ भरी पड़ी हैं


विश्वास की बात है. सच भी हो सकता है. यहाँ कम से कम गाधी का दूध तो मिल रहा है, कयी तो 2000 के बदले सिरफ आशीर्वाद ही बांटते हैं. कतारें वहन भी लगती हैं, कतारें यहाँ भी हैं.


'बिजली की दरें तय करने में दखल नहीं दे सकती आप सरकार'

 5.62 मीटर के डाइयामीटर से पेरबॉलिक डिश एक छोटे से उपकरण के ऊपर सोलर अवर्स के समय सोलर रे को कॉन्सेंट्रेट करके 15 किलोवेट तक का बिजली उत्पादन किया जा सकता है. 

फ्लूइड की जगह हवा इस्तेमाल होती है. 

उसकी कंप्लीट इंजिनियरिंग डीटेल्स रिपोर्ट तैयार हो चुकी है. 


प्रोटटाइप की डेवेलपमेंट के लिये फिनांसेर चाहियें. 

एउरोप के अंदर प्रोटटाइप की कॉस्ट 1लाख 30000 यूरो आयेगी 

किन्तु भारत में 30 लाख रुपये से यदा कॉस्ट नहीं आयेगी. 

जे वी आर सोलर टेक्नीक जोनस विल्लारूबिया ऱुइz (मॅड्रिड) (Jonas Villarubia Ruiz) ने डेवेलप की है.

 नो जोक.
 
इंट्रेस्टेड पार्टीस कॉंटॅक्ट कर सकती हैं. 

सभी पेटेंट और टेक्निकल डॉक्युमेंट्स स्पॅनिश . इंग्लीश ट्रॅनस्लेटेड मेरे पास हैं. ट्रॅनस्लेट मैने किये हैं 

अगर आप .कूड़ा उठाने का सही ढंग प्रदान करें तो कॅलिफॉर्निया से एक ग्रूप इंट्रेस्टेड है जो बियोगास से बिजली पैदा करने में इंट्रेस्टेड है. 

उनको सिरफ कूड़ा उठाने का सिस्टम चाहिये. 

हेवी सॉल्ट्स की मदद से बॅटरी पर निर्भरता खतम की जा सकती है. रियल सॉलिड इंफो मेरे

Cow - Why it is sacred to Hindus?

गाय को माता माना जाता है क्योंके भारत देश खेती पर आधारित देश था और है, बिना बैल और गाय के खेती नहीं हो सकती थी. महामरीओं की वजह से जब क्रोडों लोग मारे जाते थे तो बच्चे ज़िन्दा रह सकें, इसके लिये गाय का दूध उत्तम माना जाता था. इन दोनो बातों की वजह से गाय को माता का दर्ज़ा दिया गया था. अगर कल को गधी का दूध पीकर आपके बच्चे की जान बच जाये तो मुझे पूरा यकीन हैं के आप गधी को माता का दर्ज़ा देने से नहीं झिझकेंगे. अगर ऐसा नहीं है तो आप किसी ऐसी औरत से पूछना जिसकी गोद में उसका बच्चा खाने के अभाव में दम तोड रहा है. कयी बार आपका फैसला तब तक नहीं बदलता जब तक आपका खुद हक़ीक़त से सामना नहीं होता. "अन्न दाता" की पूजा को जाती है भारत में. खुद से प्रशन करें के ऐसा क्यों है

ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्र पर हमला, कोमा में

भारतीय लोगों की अहिंसक और गैर आक्रामक छवि के चलते हिंसा के आसान लक्षय बन रहे हैं हिन्दुस्तानी विद्यार्थी. अहिंसक होना विदेश में एक विफल नीति है. कोई भी ना तो हिन्दुस्तानी नागरिकों को और ना ही भारतीय सरकार को गंभीरता से लेता है. कल ही दो चार ऑस्ट्रेलियन लोगों के जबडे तोड दो, देखना कैसे लाइन पर आते हैं सभी. अगर आपको मार खाने से हरज़ नहीं तो टिका कर दो चार लगाने से परहेज़ क्यों? अगर भारत सरकार को सेना के सज-ओ-समान के लिये अरबों रुपये खरचने पर संकोच नहीं तो खुद हथ्यार बना कर विदेशों में बेचने में हरज़ क्यों? यह दोहरे मापदंड आपकी कौन सी व्यक्तिगत या राष्‍ट्रीय नीति का हिस्सा हैं?

Messages for Kejriwal


  1. जब राष्‍ट्रीय स्तर पर गुणवत्ता लाने की बात हो तो कोई फिनिश लाइन नहीं होती. सिरफ बिजली पानी पर नियंत्रण काफी नहीं है. केजरीवाल, तुम खुल कर कदम बढाओ, हरेक दिशा में. नियती खुद ब खुद तुम्हारे लिये रास्ता सॉफ करती जायेगी. तुम अकेले नहीं हो, में तुम्हारे साथ हून.
  2. तजुर्बे की पाठशालाओं में सबक़ तकलीफदेह, कठिन, महन्गे और कभी कभी आत्म-सम्मान या व्यक्तिगत सम्पती के नुकसान के बाद हासिल होते हैं, लेकिन सिरफ इसी रास्ते पर जाने से ही बेअकलों को अकल आती है और सबक लेने के बाद जब वो दुबारा कोशिश करते हैं, सब कुछ जानते हुये भी तो वो कर्मयोगी कहलाते हैं. केजरीवालतुम आगे बढो. तुम अकेले नहीं हो, मैं तुम्हारे साथ हूं.
  3. असाधारण काम करने और घीसी पिटी लकीरों का नश करने के लिये, असाधारण व्यक्तिओं के असाधारण जज़्बे की ज़रूरत होती है. केजरीवाल, आगे बढो. में तुम्हारे साथ हून
  4. गुणवत्ता कभी भी घटनावश नहीं आती, यह सदैव कर्मठऔर बुढिमान् प्रयास का परिणाम होता है. केजरीवाल, आगे बढो और प्रयास करो, मेँ तुम्हारे साथ हून.
  5. किसी भी इन्स्टिट्यूट, सरकार या ऑफीस के आधार को समझने के लिये आपको उनसे बातचीत का दौर शुरु करना होता है, जो अक्सर उनको नापसंद होता है. उनकी पसंद और नापसंद ही आपके अनुभव की पहली सीधी होती है. केजरीवाल, आगे बढो, सभी विभागों से संवाद शुरु करो. उन्हीं से उनकी त्रुतिओं और खमिओं के बारे में पूछो. उनकी अच्छी बातों को0 तुरंत लागू करो. यही इन्स्टिट्यूट तुम्हारे सक्षम राजकौशल का गुणगान करेंगे और तुम्हारे सफल राजनैतिक जीवन का आधार बनेंगे. याद रखो, सभी ज़िम्मेदार लोग तुम्हारा रास्ता देख रहे हैं टके वो खुल कर उन तब्दीलिओं को लागू कर सकें, जो आज तक वो दूसरी सरकारों के रहते नहीं कर सके. आगे बढो केजरीवाल, तुम अकेले नहीं हो.
  6. राजनेताओं में कोई खास अंतर नही होता. लेकिन वोही राजनेता श्रेष्ठ गिना जाता है जो दूसरे राजनेताओं की गलतिओं से सबक लेता है. आगे बढो केजरीवाल, तुम्हारे पास शीला दीक्षित से लेकर मनमोनिया तक मुंह लटकाये हुये खड़े हैं, इन्हीं की गलतिओं से सीखो और उन्ही गाल्तिओं को सब से पहले सुधारो. दुनिया तुम्हारे फैसलों को श्रेष्ठ मानेगी. 50-50 के बी सी से कुछ सीखो
  7. समय आने पर और मौका मिलने पर अनुभव हासिल करने से ज़्यादा तुलनात्मक ढंग से सिरफ एक ही ज़्यादा बात दुखदायक होती है और वो है के मिले मौके को अनुभव में तब्दील ना करना. आगे बढो केजरीवाल, में तुम्हारे साथ हूं.
  8. आगे बढो केजरीवाल, तुम्हारे यही कंटीले अनुभव तुम्हारी ज़िंदगी में आई सभी खुशिओं से ज़्यादा तुम्हारी ज़िंदगी को सार्थक करने में मददगार साबित होंगे. अगर दूसरों ने सत्ता संभाली होती तो यह कांटे उनके हिस्से आये होते. तुम खुशकिस्मत हो. में तुम्हें मुबारकबाद देता हूँ.

  9. यह ज़िंदगी, हमारे शबद और विचार अगर कर्मों में परिवर्तित ना किये जाएं तो उनका अस्तित्व होना ही बेकार है. आगे बढो केजरीवाल, अपनी ज़िंदगी, अपने शब्दों औरअपने विचारों को भौतिक रूप देकर उन्हें सार्थक करो. में तुम्हारे साथ हून.

  10. केजरीवाल, तुम्हारे लिये हुये फैसले ही तुम्हारे निर्णय लेने और उनको लागू करने की क्षमता के प्रदर्शनिक सबूत हैं. जो भी फैसला करो, उसे अंजाम तक पहुंचाओ. लोग खुद कहेंगे "बेटा हो तो केजरीवाल जैसा".
  11. अनुभव ही इंसानों को एक दूसरे से अलग बनाता है. जो यह अनुभव का माध्यम आपके नियंत्रण में आया है, इसको व्यर्थ मत जाने दें. मुख्य मंत्री के इस सतंभ को इतनी इज़्ज़त दिला दो के हर कोई काहे, "वाह भाई केजरीवाल, मंत्री हो तो तुम जैसा"
  12. ज्ञान और बुधी, दोनों अनुभव की औलाद होती हैं. यह दोनो हासिल होने के बाद इंसान या तो दानी बन जाता है या अहंकारी. केजरीवाल, तुम दानी बनना. अहंकारी पहले ही भारत में बहुत है. आगे बढो केजरीवाल, में तुम्हारे साथ हून.

  13. अनुभव ही इकलौता रास्ता है जो तुम्हारे लिये नये नये रास्ते और द्वार खोलता है. तुमने सी एम तक सफलतापूर्वक और इतनो जनता के सहयोग से पहुंच बनाई है. तुम्हारा सी एम का अनुभव कितने लोगों की ज़िंदगी को रौशन कर सकता है, इस पर सोचो. आगे बढो केजरीवाल, किसी की निन्दा तुन्हारा रास्ता रोक नहीं सकती, निश्चिंत, आत्मविश्वास और धैर्य से कदम बढाओ. निंदक खुद ब खुद पीछे हटकर तुम्हारा रास्ता सॉफ करते जायेंगे.
  14. छोटे छोटे हादसे और ज़िम्मेदारियाँ बड़े बड़े अनुभवों को जनम देते हैं. डेल्ही का चीफ मिनिस्टर होना ही सब कुछ नहीं होता. दुनिया में प्राइम मिनिस्टर और प्रेसीडेंट भी बहुत हैं. दुनिया में एक विशव नेता की कमी है. यह खाली जगह तुम्हारे लिये सुरक्षित है. ईमानदारी से अपने करम करते जाओ. यकीन करो, पूरे भारतवर्ष में इस समय इस जगह को पूरण करने के लिये तुमसा योग्य इंसान कोई नहीं. आगे बढो केजरीवाल, में तुम्हारे साथ हून.



Tajuruba

You:  तजुर्बे की पाठशालाओं में सबक़ तकलीफदेह, कठिन, महन्गे और कभी कभी आत्म-सम्मान या व्यक्तिगत सम्पती के नुकसान के बाद हासिल होते हैं, लेकिन सिरफ इसी रास्ते पर जाने से ही बेअकलों को अकल आती है और सबक लेने के बाद जब वो दुबारा कोशिश करते हैं, सब कुछ जानते हुये भी तो वो कर्मयोगी कहलाते हैं. केजरीवालतुम आगे बढो. तुम अकेले नहीं हो, मैं तुम्हारे साथ हूं.

'तुम्हें खाने का भी ढंग नहीं, मुझे तलाक चाहिए

मेरा टूतपेस्ट इतना सेन्सिटिव है के जवब में कोई और टूतपेस्ट इस्तेमाल करता हून तो वो एमोशनल हो जाता है क्योंके उसे मेरी यह बात पसंद नहीं.

Kejriwal and his "No Security"

Krishna Murari says: दस गुना महंगी पड़ रही है केजरीवाल की सुरक्षा ऐसा कहा जाता है कि सरोजिनी नायडू ने कहा था कि महात्मा गांधी को 'गरीबी' में रखने का खर्च बहुत ज्यादा था। इसी तरह का मामला दिल्ली के नए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सुरक्षा न लेने से सामने आ रहा है। अरविंद केजरीवाल को आम आदमी बनाए रखने के लिए उन्हें पिछले मुख्यमंत्रियों से दस गुना ज्यादा पुलिसवालों की सुरक्षा देनी पड़ रही है। दिल्‍ली पुलिस अब तक मुख्‍यमंत्री की सुरक्षा के लिए जहां 10 पुलिसकर्मियों को तैनात करती रही है, वहीं नए मुख्‍यमंत्री के द्वारा नियमित प्रोटोकॉल का पालन नहीं करने से उनकी सुरक्षा में 100 से ज्‍यादा पुलिसकर्मियों को तैनात करना पड़ रहा है। हाल ही में रिटायर्ड हुए एक आईपीएस अधिकारी महसूस करते हैं कि सुरक्षा लेने से इनकार करके केजरीवाल अव्यावहारिक रवैया अपना रहे हैं। इस वजह से उनकी सुरक्षा में ज्यादा जवान लगाने पड़ रहे हैं और इसके साथ ही यह खतरा भी बना रहता है कि उनके साथ बदसलूकी हो सकती है या हमला हो सकता है।

Pradeep Kumar Comments:

वैसे गौर करने वाली बात है आप दस गुना की बात कर रहे हैं. आपने कोई डाटा नहीं दिया.
10 गुना किस रकम का?

नॉर्मल कितना खरच आता है और अब कितना आ रहा है?
जो रिटाइर हुये आइ पी एस अधिकारी हैं उनका नाम तक आपने नहीं बताया और उनकी सूचना किस आधार पर खड़ी है?
कहीं बादलों में से अलग अलग आकृतियाँ बनाकर बच्चों का दिल बहलाने की चेष्टा नही की जा रही?

सुरक्षकर्मिओं की सुरक्षा भी एक चिंता का विषय है. अगर ऐसी बात है तो सुरक्षा विभाग पूरी रिपोर्ट दे कर केजरीवाल को सुरक्षा लेने के लिये मजबूर कर सकता है. हठधर्मी होना अच्छी बात नहीं होती. किसी भी अवांछित घटना से बचने के लिये, केजरीवाल को सुरक्षा कवच ले लेना चाहिये. किन्तु यह सिरफ इसलिये नहीं होना चाहिये के हम लोगों ने कुछ कॉमेंट लिख दिये या क्योंके हम अपने आप को ज़्यादा स्याने समझ रहे हैं

विधानसभा में 'AAP की टोपी' पर बीजेपी ने उठाए सवाल

 मेरे ख्याल में अगर बी जे पी को 2014 चुनाव में विजय हासिल करनी है तो उसे फूहड़पन और हल्कापन छोड़ना पड़ेगा. 

चुनाव जीतने के लिये बी जे पी के पास एक ही रास्ता है के वो साबित करे के वो भी केजरीवाल जितनी या उससे ज़्यादा ईमानदार है. 

जनता भ्रष्टाचार मुक्त संस्थाएं चाहती है, विकास की बात बाद में. 

अगर बी जे पी ने समय की मांग नहीं पहचानी तो केजरीवाल जी को प्राइम मिनिस्टर बनने से कोई नहीं रोक सकता. 

अगर कॉंग्रेस "आप" को डेल्ही विधान सभा में सपोर्ट जारी रखती है तो बी जे पी जीत कर भी हारी हुई मानी जायेगी. 

कॉंग्रेस को रिकवर करने के लिये पांच साल मिल जायेंगे और बी जे पी का सपना, सपना ही रह जायेगा.

जब कोई और विषय नहीं मिला तो छोटी छोटी गलतिओं को ही बड़ा कर के दिखाओ. कहते हैं "कूएँ में गिरि इंट सूखी बाहर नहीं निकलती, थाने में पहुँचा आदमी बिना मार खाये नहर नहीं आता." अब कुछ ऐसा, "संसद में सौगंध उठाने वाला मंत्री आलोचना से बच नहीं सकता". वजह जो भी हो, केजरीवाल जी को ऐसी गलतियाँ दोहरानी नहीं चाहियें.

Kejriwal, Congress and BJP

केजरीवाल जी, आगे बढो. 
कॉंग्रेस को आप इस्तेमाल कर चुके. 

बी जे पी को किसी भी तरह जोकर के तौर पर इस्तेमाल करो और अपनी कोई भी लाइफ्लाइन ज़िन्दा कर लो. 

घबराओ मत, शर्माओ मत. 

के बी सी देखा होगा. 

लाइफ्लाइन से ज़ितनी लाइफ आगे बढे, उसको जनता की भलाई के लिये इस्तेमाल करो. 

लोग साधन को भूल जाते हैं किन्तु जिन लक्ष्यों और उद्देश्यों को प्राप्त करोगे, उसे हमेशा याद रखेगी. 

आगे बढो केजरीवाल, में तुम्हारे साथ हूँ.

के बी सी में कोई याद नहीं रखता के कितने लाइफ लाइन इस्तेमाल हुये, सभी इतना याद रखते हैं के किसने कितनी रकम जीती.

Corporates and AAP Party win

S ALLAHABADI ALLAHABADI: वो अम्बानी अदानी को सब्सिडी देते है ,… और आप ,.... आपको ,.... 
उनको तो बुरा लगेगा ही ,.... जो पैसा उनके (बीजेपी कांग्रेस) के मालिको के पास जाना था ,.... 
वो पैसा अब आप के मालिको के पास जाएगा ,.... 
उनके मालिक ,… अम्बानी अदानी (याद करो नीरा राडिया की आवाज़),.... 
आप के मालिक ,.... जी हाँ ,… सिर्फ आप ,… 
हाँ आपने तो चुनाव ,.... आपके पैसे से लड़ा है ,… किसी अम्बानी अदानी के पैसे से नहीं ,…



बिल्कुल सही कहा. शायद आप के जीत जाने से एस्टॅब्लिश्ड राजघरानों का बहुत नुकसान हुआ है. 

अगर "आप" पांच साल तक कायम रहती है तो ... सोचूं भी तो आँखें फटी की फटी रह जाती हैन.

यह अंबानी, टाटा वगैरा हमारे लीगल सिस्टम के अंदर रहते हुये बड़े माफिया हैं.

Sanjay Niruppam from Mumbai adopts AAP Style

 श्री निरुप्पमजी भी तो हम में से है. 

अच्छे करम करने की चाहत रखने वालों को प्रोत्साहन दें. 

मेरे लिये केजरीवाल जी और निरुप्‍पाम जी सिरफ उपकरण हैं एक बड़े विचार को भूतल पर देखने के लिये. 

यह खेल केजरीवाल या निरुप्पम नहीं, में और मेरे जैसे लोग खेल रहे हैं. 

और क्योंके केजरीवाल जी को कभी भी मारा जा सकता है, इसलिये ... इस राष्ट्र की हर गली, हर मुहल्ले और नुक्कड पर केजरीवाल बनाने होंगे.

निरुप्पम भाई, में तुम्हारे साथ हूँ. 

और आपमें से भी जो कोई इसी रास्ते पर चलना चाहे, तैयार रहे. 

इस देश को और मुझे अनेकों केजरीवाल की ज़रूरत है.


second entry: संजय निरूपम जी ने बहुत ही अच्छा कदम उठाया है. वो कुछ भी हों, किसी भी पार्टी या गोत्र के हों, ले दे कर वो भी हम में से ही एक हैं.  अच्छा किया है उन्होने. मेरी तरफ से उन को शुभ कामनाएँ.

धर्म निरपेक्षता और "आम आदमी पार्टी"

धरम-निरपेक्ष कोई नहीं हो सकता, हो जाने का दवा कर सकता है किन्तु ऑलमोस्ट असंभव है. 

इस शबद को खतम कर दो और कोई और नया शबद ढूंडो जो ज़्यादा स्टेक हो. 

वैसे मेरे कारोबर में मेरे पास सभी धरम के लोग आते हैं लेकिन वो तो मेरे कस्टमर हैं. अगर में धरम निरपेक्षता के नाम पर किसी खास वरग को स्पेशल डिसकाउंट देना शुरु कर डून तो क्या में क्ष्- निरपेक्षता के सर्टिफिकेट का हक़दार हो जयूंगा? 

कोई मजबूरी की वजह से सभी को ब्राबर समझने का नाटक कर सकता है. 

मेरे हिसाब से में उत्तम हून, मेरा परिवार, मेरा समाज, मेरा धरम, मेरा देश उत्तम है और तुम्हारा सब कुछ बेकार, गंदा घटिया. तो क्या में निरपेक्ष हो सकता हून? क्या में भिखारी को साथ में बिठाकर खाना खिला सकता हून? 

नहीं, तो अपनों के अपेक्षा तो खून में है, कमल फ़ारूक़ी हो या प्रदीप कुमार, एक ईगो है जो सबमें कूट कूट कर भरी हुई है. 

आप को अपने जन-आधार को बढाना है, यह लक्ष्य है इसलिये उसको क्लियर कर देना चाहिये के धरम निरपेक्षता के बारे में उनकी क्या राय है?



अपेक्षा का जनम और निरपेक्षता का अंतिम संस्कार तो उसी समय हो जाता है जब हम किसी को मुस्करा कर नमस्ते ही कह देते हैं.

 यदि यह सत्य है तो निरपेक्षता के नाम पर भारतीय राजनीति में इतने बड़े बड़े ड्रामे क्यों? 

इतना सब लिखने के बाद में अपेक्षा करता हून के आप मुस्करा रहे होंगे. 

निरपेक्षता की उदाहरण दे रहा हून. 

साक्षात्कर्ता ने उम्मीदवार से कहा, "तुम अपनी सबसे बड़ी कमज़ोरी बताओ": 

उम्मीदवार :- "सत्य बोलना और ईमानदारी मेरी सब से बड़ी कमज़ोरी है". 

साक्षात्कर्ता: "यह तुम्हारी कमज़ोरी नहीं, ताक़त है". 

उम्मीदवार का निरपेक्ष जवाब: - "अबे बूढ़े खूँसत, तू जो मर्ज़ी कहता रहे, मुझे फरक नही पड़ता, मुझे मालूम है के यह मेरी कमज़ोरी है".